गर्मियों का मौसम शुरू होते ही घर में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन सा कूलर खरीदें और कितने बड़े कमरे के लिए कौन सा कूलर सही रहेगा। कई लोग सिर्फ डिजाइन या कीमत देखकर कूलर खरीद लेते हैं लेकिन बाद में कूलिंग सही नहीं मिलने पर परेशानी होती है। दरअसल कूलर खरीदते समय कमरे का आकार, एयर फ्लो, टैंक क्षमता और कूलर का प्रकार जानना बेहद जरूरी होता है। अगर सही साइज का कूलर चुना जाए तो कम बिजली खर्च में बेहतर ठंडक मिल सकती है।
छोटे कमरे (50 से 120 स्क्वायर फीट) के लिए कौन सा कूलर सही
अगर आपका कमरा छोटा है जैसे कि स्टडी रूम, छोटा बेडरूम या ऑफिस स्पेस, तो आपके लिए पर्सनल कूलर सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। इस तरह के कूलर आमतौर पर 20 से 40 लीटर टैंक क्षमता के साथ आते हैं और कम बिजली की खपत करते हैं। छोटे कमरे में ज्यादा बड़ा कूलर लगाने से बिजली की बर्बादी हो सकती है और नमी भी बढ़ सकती है।
छोटे कमरे के लिए ऐसे कूलर चुनें जिनकी एयर डिलीवरी 1000 से 2000 m³/hr के बीच हो। इससे कमरे में ठंडक संतुलित बनी रहती है।
मध्यम आकार के कमरे (120 से 200 स्क्वायर फीट) के लिए कौन सा कूलर लें
अगर आपका कमरा मीडियम साइज का है जैसे सामान्य बेडरूम या ड्राइंग रूम, तो डेजर्ट कूलर या टावर कूलर अच्छा विकल्प हो सकता है। इस तरह के कूलर में 40 से 70 लीटर टैंक और ज्यादा एयर थ्रो मिलता है जिससे पूरे कमरे में हवा अच्छी तरह फैलती है।
इस साइज के कमरे के लिए 2000 से 3500 m³/hr एयर डिलीवरी वाला कूलर अच्छा माना जाता है। अगर कमरा बंद रहता है तो एग्जॉस्ट या हल्की वेंटिलेशन जरूर रखें क्योंकि कूलर खुले एयर फ्लो में बेहतर काम करता है।
बड़े कमरे (200 से 350 स्क्वायर फीट या उससे ज्यादा) के लिए कौन सा कूलर बेहतर
अगर कमरा बड़ा है या हॉल जैसा स्पेस है तो बड़ा डेजर्ट कूलर सबसे सही रहेगा। इसमें 70 लीटर से 120 लीटर तक का पानी टैंक मिल सकता है और इसकी एयर डिलीवरी ज्यादा होती है जिससे बड़े एरिया में भी अच्छी कूलिंग मिलती है।
बड़े कमरे के लिए 3500 से 6000 m³/hr एयर फ्लो वाला कूलर लेना बेहतर रहता है। ऐसे कूलर की मोटर ज्यादा पावरफुल होती है और बड़े स्पेस में भी ठंडी हवा पहुंचाने में सक्षम रहती है।
कूलर खरीदने से पहले ये जरूरी बातें जरूर देखें
कूलर खरीदने से पहले सिर्फ साइज नहीं बल्कि कुछ जरूरी फीचर्स भी ध्यान में रखने चाहिए। हमेशा हनीकॉम्ब कूलिंग पैड वाला कूलर चुनें क्योंकि ये ज्यादा समय तक चलता है और बेहतर कूलिंग देता है। साथ ही इन्वर्टर सपोर्ट भी जरूरी है ताकि बिजली जाने पर भी कूलर चल सके।
अगर पानी बार-बार भरने की परेशानी नहीं चाहिए तो ऑटो वाटर फिल सिस्टम वाला कूलर लेना बेहतर रहेगा। इसके अलावा पहियों वाला मॉडल चुनें ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकें।
कूलर और AC में क्या फर्क समझना जरूरी है
कई लोग सोचते हैं कि बड़ा कूलर AC जैसी कूलिंग देगा लेकिन ऐसा नहीं होता। कूलर प्राकृतिक तरीके से हवा को ठंडा करता है और कम बिजली खर्च करता है जबकि AC कमरे का तापमान कम करता है। अगर आपका बजट कम है और बिजली बचानी है तो सही साइज का कूलर बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
कूलर खरीदते समय ये गलती न करें
अक्सर लोग सिर्फ ज्यादा लीटर वाला कूलर खरीद लेते हैं और सोचते हैं कि ज्यादा बड़ा मतलब ज्यादा ठंडक, लेकिन ऐसा हर बार सही नहीं होता। छोटे कमरे में बड़ा कूलर ज्यादा नमी पैदा कर सकता है जबकि बड़े कमरे में छोटा कूलर बिल्कुल असर नहीं करेगा। इसलिए कमरे के साइज के हिसाब से कूलर चुनना सबसे जरूरी होता है।
निष्कर्ष
अगर आप इस गर्मी नया कूलर खरीदने जा रहे हैं तो पहले अपने कमरे का साइज जरूर माप लें। छोटे कमरे के लिए पर्सनल कूलर, मीडियम रूम के लिए टावर या डेजर्ट कूलर और बड़े कमरे के लिए हाई एयर डिलीवरी वाला डेजर्ट कूलर सबसे बेहतर रहता है। सही कूलर चुनने से न सिर्फ बेहतर ठंडक मिलेगी बल्कि बिजली और पैसे दोनों की बचत भी होगी।









